आरती क्या है और यह कब व क्यों की जाती है? सनातन धर्म में किसी भी पूजा, व्रत, अनुष्ठान या संध्या वंदन का चरमोत्कर्ष सदैव आरती (Aarti) के साथ ही पूर्ण होता है। दीपक की पावन ज्योति, कर्पूर की सुगंध, शंख और घंटों के नाद के साथ जब भक्त अपने …
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आरती क्या है और यह कब व क्यों की जाती है? सनातन धर्म में किसी भी पूजा, व्रत, अनुष्ठान या संध्या वंदन का चरमोत्कर्ष सदैव आरती (Aarti) के साथ ही पूर्ण होता है। दीपक की पावन ज्योति, कर्पूर की सुगंध, शंख और घंटों के नाद के साथ जब भक्त अपने …
Read More »सनातन धर्म में सभी व्रतों में सर्वश्रेष्ठ ‘एकादशी व्रत’ के समापन और पूजन के लिए “ॐ जय एकादशी माता” (Ekadashi Aarti) का गायन अनिवार्य माना जाता है। पद्म पुराण के अनुसार एकादशी कोई साधारण तिथि नहीं, बल्कि साक्षात भगवान श्री हरि विष्णु के शरीर से प्रकट हुई एक महाशक्ति हैं …
Read More »सनातन धर्म में धन, ऐश्वर्य, सौभाग्य और सुख-समृद्धि की अधिष्ठात्री देवी मां महालक्ष्मी की आराधना के लिए “ॐ जय लक्ष्मी माता” (Om Jai Laxmi Mata) सर्वोपरि और सबसे सिद्ध स्तुति मानी जाती है। विशेष रूप से दीपावली, शुक्रवार, वरलक्ष्मी व्रत और शरद पूर्णिमा के अवसर पर हर सनातनी घर व …
Read More »संकटमोचन महाबली श्री हनुमान जी की स्तुति के लिए “आरती कीजै हनुमान लला की” (Aarti Kije Hanuman Lala Ki) सबसे सिद्ध और शक्तिशाली आरती मानी जाती है। मंगलवार, शनिवार और हनुमान जन्मोत्सव के पावन अवसरों पर यह आरती हर घर और मंदिर में गाई जाती है। इस आरती की रचना …
Read More »सनातन परंपरा में “आरती कुंजबिहारी की” (Aarti Kunj Bihari Ki) भगवान श्री कृष्ण के मनमोहक स्वरूप की सर्वाधिक गाई जाने वाली स्तुति है। वृंदावन के बांके बिहारी मंदिर से लेकर देश-विदेश के हर कृष्ण मंदिर और घर में यह आरती नित्य गूंजती है। हालांकि, ब्रजभाषा और प्राचीन काव्य-शैली में रचित …
Read More »॥ राजा दशरथ कृत श्री शनि स्तोत्र: सटीक शब्दार्थ एवं भावार्थ सहित ॥ ज्योतिष और धर्मग्रंथों में भगवान शनिदेव के प्रकोप, साढ़ेसाती, ढैय्या और महादशा के दुष्प्रभावों को शांत करने के लिए ‘दशरथ कृत शनि स्तोत्र’ (Dashratha shani stotram) को संसार का सबसे अचूक और शक्तिशाली स्तोत्र माना गया है। …
Read More »॥ श्री बृहस्पति देव चालीसा: सटीक शब्दार्थ एवं भावार्थ सहित ॥ नवग्रहों में देवताओं के पूज्य गुरु और ज्ञान, बुद्धि, शिक्षा, विवाह तथा सुख-समृद्धि के अधिष्ठाता देव बृहस्पति देव (गुरु ग्रह) हैं। कुंडली में गुरु दोष शांति, वैवाहिक बाधा दूर करने और बुद्धि-विवेक की प्राप्ति के लिए गुरुवार के दिन …
Read More »॥ श्री खाटू श्याम जी की आरती: सटीक शब्दार्थ एवं भावार्थ सहित ॥ कलयुग के प्रत्यक्ष देव और ‘हारे का सहारा’ कहे जाने वाले भगवान श्री खाटू श्याम जी (बर्बरीक) Shri Khatu Shyam जी की आरती का पाठ करने से भक्तों के सभी कष्ट और संकट दूर होते हैं। अक्सर …
Read More »॥ श्री शुक्र देव चालीसा: सटीक शब्दार्थ एवं भावार्थ सहित ॥ नवग्रहों में असुरों के परम ज्ञानी गुरु और भौतिक सुख, धन-वैभव, ऐश्वर्य, कला तथा वैवाहिक प्रेम के स्वामी भगवान शुक्र देव (शुक्राचार्य) हैं। कुंडली में शुक्र ग्रह की अनुकूलता से मनुष्य को हर प्रकार का सांसारिक सुख प्राप्त होता …
Read More »॥ श्री शनिदेव जी की आरती: सटीक शब्दार्थ एवं भावार्थ सहित ॥ भगवान शनिदेव को नवग्रहों में न्यायधीश और कर्मफल दाता का स्थान प्राप्त है। अक्सर आरती गाते समय (Shani Dev Ki Aarti) कई प्राचीन और अवधी शब्दों का अर्थ स्पष्ट नहीं होता। यहाँ श्री शनिदेव जी की संपूर्ण आरती, …
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