संक्षेप में: श्री हनुमान चालीसा 16वीं शताब्दी में गोस्वामी तुलसीदास जी द्वारा रचित 40 चौपाइयों और 3 दोहों का एक अत्यंत शक्तिशाली भक्ति स्तोत्र है। इसके नित्य पाठ से भय, संकट, रोग और ग्रह दोषों का निवारण होता है। सनातन धर्म में भगवान हनुमान जी को ‘कलयुग के जाग्रत देव’ …
Read More »Chalisa Kya Hai? चालीसा में 40 लाइनें ही क्यों होती हैं? जानिए इसका रहस्य और इतिहास!
संक्षेप में: चालीसा (Chalisa) का अर्थ 40 चौपाइयों में रचित भक्ति स्तुति है। इसकी शुरुआत 16वीं सदी में गोस्वामी तुलसीदास जी द्वारा रचित श्री हनुमान चालीसा से हुई थी। यह जनभाषा में रचित ईश्वर से जुड़ने का सबसे सरल और प्रभावशाली माध्यम है। सनातन परंपरा में देवी-देवताओं की उपासना के …
Read More »श्री सूर्य देव चालीसा (Surya Dev Chalisa): संपूर्ण पाठ, शब्दार्थ और भावार्थ
श्री सूर्य देव चालीसा (Shri Surya Dev Chalisa) सूर्य चालीसा क्या है? श्री सूर्य देव चालीसा भगवान सूर्यदेव की महिमा, तेज, प्रकाश और दिव्य स्वरूप का वर्णन करने वाला भक्तिपूर्ण पाठ है। इसमें सूर्यदेव के अनेक पावन नामों के साथ उनके रथ, सात अश्वों, सारथी अरुण और उनकी सर्वव्यापी प्रकाशमय …
Read More »श्री शनि चालीसा (Shani Chalisa) | संपूर्ण पाठ और सरल भावार्थ
शनि चालीसा क्या है? | What is Shani Chalisa? शनि चालीसा शनिदेव की स्तुति और भक्ति का एक प्रसिद्ध पाठ है। इसमें शनिदेव के विभिन्न नाम, उनके स्वरूप, महिमा और उनसे जुड़े पौराणिक प्रसंगों का वर्णन मिलता है। भक्त श्रद्धा और विश्वास के साथ इसका पाठ करके शनिदेव का स्मरण …
Read More »झूलेलाल जी की आरती | Jhulelal Ji Ki Aarti | ॐ जय दूलह देवा
॥ झूलेलाल जी की आरती ॥ ॐ जय दूलह देवा, साईं जय दूलह देवा। पूजा कनि था प्रेमी, सिदुक रखी सेवा ॥ तुहिंजे दर दे केई, सजण अचनि सवाली। दान वठन सभु दिलि, सां कोन दिठुभ खाली॥ ॐ जय दूलह देवा…॥ अंधड़नि खे दिनव, अखडियूँ – दुखियनि खे दारुं। पाए …
Read More »भगवान श्री गणेश जी की आरती – अर्थ सहित | Shri Ganesh Ji Ki Aarti
जय गणेश, जय गणेश, जय गणेश देवा। माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा॥ सरल भावार्थ: हे देवों के देव श्री गणेश जी, आपकी सदा ही जय-जयकार हो। आपकी माता साक्षात माता पार्वती हैं और आपके पिता देवाधिदेव महादेव शिव जी हैं। हम आपको बारंबार प्रणाम करते हैं। एक दंत दयावंत, चार …
Read More »शिव आरती का सरल हिंदी अर्थ: जानिए हर पंक्ति का असली राज
ॐ जय शिव ओंकारा, स्वामी जय शिव ओंकारा। ब्रह्मा, विष्णु, सदाशिव, अर्द्धांगी धारा॥ ॐ जय शिव…॥ अर्थ: हे ओंकार स्वरूप भगवान शिव, आपकी जय हो। आप ही ब्रह्मा, विष्णु और सदाशिव के रूप में संपूर्ण जगत में व्याप्त हैं और अपने अर्द्धनारीश्वर रूप में माता पार्वती को धारण किए हुए …
Read More »महामृत्युंजय मंत्र: वैज्ञानिक, तांत्रिक और दार्शनिक रहस्य
महामृत्युंजय मंत्र (ऋग्वेद: ७.५९.१२) सनातन परंपरा का एक ऐसा मंत्र है जिसे केवल एक पूजा-पाठ या धार्मिक श्लोक मानना इसकी महत्ता को सीमित करना होगा। वैदिक, तांत्रिक और आधुनिक चिकित्सा विज्ञान के दृष्टिकोण से यह मंत्र केवल भगवान शिव की स्तुति नहीं, बल्कि मनुष्य के मन और शरीर को डर, …
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