Maa Bhuvaneshwari Aarti: हर संकट व भय दूर करने वाली पावन स्तुति
माँ भुवनेश्वरी (Maa Bhuvaneshwar) दस महाविद्याओं में चतुर्थ पावन स्वरूपा हैं, जो समस्त ब्रह्मांड का पालन और पोषण करती हैं।
माँ भुवनेश्वरी (Maa Bhuvaneshwar) दस महाविद्याओं में चतुर्थ पावन स्वरूपा हैं, जो समस्त ब्रह्मांड का पालन और पोषण करती हैं।
सनातन धर्म में माँ बगलामुखी आरती (Maa Baglamukhi) का नियमित गान जीवन के सबसे कठिन संकटों, अकारण सताने वाले
सनातन धर्म की शक्ति उपासना में दस महाविद्याओं का स्थान सर्वोपरि माना गया है। इनमें द्वितीय महाविद्या के रूप में
द्वादश ज्योतिर्लिंगों में सर्वोच्च स्थान रखने वाली पावन नगरी काशी में ब्रह्ममुहूर्त का समय अत्यंत अलौकिक और कल्याणकारी होता है।
द्वादश (12/ बारहा) ज्योतिर्लिंगों में प्रधान भगवान शिव की पावन नगरी काशी केवल मोक्ष का द्वार नहीं, बल्कि समस्त शुभता
सनातन परंपरा में हरिद्रा गणेश आरती (Haridra Ganesh Aarti) का श्रद्धापूर्वक पाठ जीवन के बड़े से बड़े संकट और नकारात्मक
शारदीय व चैत्र नवरात्र के नौवें और अंतिम पावन दिन यानी महानवमी पर नवदुर्गा के नौवें स्वरूप माँ सिद्धिदात्री (Maa
शारदीय व चैत्र नवरात्र के आठवें पावन दिन यानी महाअष्टमी पर नवदुर्गा के आठवें स्वरूप माँ महागौरी (Maa Mahagauri) की
शारदीय व चैत्र नवरात्र के सातवें पावन दिन नवदुर्गा के सातवें तेजस्वी स्वरूप माँ कालरात्रि (Maa Kalaratri) की आराधना की
शारदीय व चैत्र नवरात्र के छठे पावन दिन नवदुर्गा के छठे स्वरूप माँ कात्यायनी (Maa Katyayani) की उपासना पूरे श्रद्धा
शारदीय व चैत्र नवरात्रि का पांचवां पावन दिन ममता, करुणा और मोक्ष दायिनी शक्ति को समर्पित होता है। शास्त्रों के
शारदीय व चैत्र नवरात्रि का चौथा दिन सृष्टि की आदि-शक्ति माँ कूष्माण्डा की आराधना का महापर्व है। शास्त्रों के अनुसार
शारदीय व चैत्र नवरात्रि का तीसरा दिन नवदुर्गा की तीसरी अलौकिक शक्ति को समर्पित होता है। शास्त्रों के अनुसार नवदुर्गाओं
शारदीय व चैत्र नवरात्रि का दूसरा दिन माँ भगवती के घोर तपस्वी स्वरूप को समर्पित होता है। शास्त्रों के अनुसार